भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Sanskrit-Hindi Electronic Dictionary (JNU)

Jawaharlal Nehru University (JNU)

< previous123456789136137Next >

देवनागरी वर्णमाला का द्वितीय अक्षर

स्वीकृति ‘हाँ’

दया ‘आह’

पीड़ा या खेद

प्रत्यास्मरण

कई बार केवल अनुपूरक के रूप में प्रयुक्त होता है-

संज्ञा और क्रियाओं के उपसर्ग के रूप में

‘निकट’ ‘पार्श्व’ ‘की ओर’ ‘सब ओर से’ ‘सब ओर’

गत्यर्थक नयनार्थक, तथा स्थानान्तरणार्थक क्रियाओं से पूर्व लगकर विपरीतार्थक का बोध कराता है- यथा गम्=जाना, आगम्=आना, दा=देना, आदा=लेना,

(अपा* के साथ वियुक्त निपात के रूप में प्रयुक्त होकर) निम्नांकित अर्थ प्रकट करता हैआरम्भिक सीमा, (अभिविधि) ‘से’, ‘से लेकर’ ‘से दूर’ ‘में से’

पृथक्करणीय या उपसंहारक सीमा (मर्यादा) को प्रकट करता है ‘तक’ ‘जबतक की नहीं’ ‘यथाशक्ति’ ‘जबतक कि’

पृथक्करणीय या उपसंहारक सीमा (मर्यादा) अर्थों को प्रकट करने में ‘आ’ या तो अव्ययीभाव समास में अथवा सामासिक विशेषण का रूप धारण कर लेता है- आबालम् (आबालेभ्यः) हरिभक्तिः, कई बार इस प्रकार का बना हुआ समस्त पद अन्य समासों का प्रथम खण्ड बन जाता है-

विशेषणों के साथ लगकर ‘आ’ अल्पार्थवाची हो जाता है

आः

अंगीकरण, स्वीकृति

आः

प्रत्यास्मरण

आः

निश्चयेन ‘निश्चय ही’ ‘अवश्य ही’

आः

उत्तर

आः

लक्ष्मी

आः

निम्नांकित अर्थों को प्रकट करने वाला विस्मयादिद्योतक अव्यय -(क) प्रत्यास्मरण, ख) क्रोध, (ग) पीड़ा, (घ) अपाकरण, (ङ) शोक, खेद

आकत्थनम्

डींग मारना, शेखी बघारना
< previous123456789136137Next >

Search Dictionaries

Loading Results

Follow Us :   
  Download Bharatavani App
  Bharatavani Windows App